Sunday, February 8, 2026
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    मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

    लखनऊ।बाबा एजुकेशनल सोसाइटी चिनहट में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों तथा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए सभी प्रतिष्ठित वक्ताओं की उपस्थिति रही।
    प्रो. (डॉ) अर्चना चौहान ने बताया की सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. देवाशीष शुक्ला, परीक्षा नियंत्रक, अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों तथा देश-विदेश से आए वक्ताओं द्वारा पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की थीम का औपचारिक अनावरण भी किया गया।
    अपने उद्बोधन में डॉ. देवाशीष शुक्ला ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को वर्तमान समय की अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
    इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. सार्थक दवे (एमबीबीएस, एमडी, मनोचिकित्सक) एवं विकास चौधरी (भारत के शीर्ष रिलेशनशिप कोच, भावनात्मक बुद्धिमत्ता विशेषज्ञ) ने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक चुनौतियों तथा डिजिटल युग में सोशल मीडिया के प्रभाव पर अपने विचार व्यक्त किए।

    नर्सिंग शिक्षा में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा

    कार्यक्रम में कॉलेज के संरक्षक डायरेक्टर आर. के. वाजपेयी की गरिमामयी उपस्थिति रही। सम्मेलन की अध्यक्षता कॉलेज की प्रिंसिपल एवं ऑर्गनाइजिंग चेयरपर्सन प्रो. (डॉ) अर्चना चौहान द्वारा की गई। उन्होंने अपने संबोधन में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने तथा नर्सिंग शिक्षा में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
    दो दिवसीय सम्मेलन में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों जैसे टेली-साइकियाट्री, इमोशनल मैच्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मानसिक स्वास्थ्य में उपयोग, डिजिटल मेंटल हेल्थ, मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग तथा मानसिक स्वास्थ्य में उपयोग की जाने वाली विभिन्न थेरेपी के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। वक्ताओं ने आधुनिक तकनीक एवं चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान पर विशेष बल दिया।
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