Sunday, February 15, 2026
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    ईश्वर, वेद और सच का संदेश देगा आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम, सेवा और समानता की राह दिखाएंगे पाँच पिलर

    लखनऊ/आगरा। उत्तर भारत का आधुनिक आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम अब लगभग तैयार है। नई तकनीक से सुसज्जित यह संग्रहालय अतीत की गौरवगाथा को नए और आकर्षक अंदाज़ में पेश करेगा, जहां इतिहास केवल पढ़ा नहीं जाएगा, बल्कि महसूस किया जाएगा।

    ब्रज क्षेत्र की यह महत्वाकांक्षी परियोजना न सिर्फ पर्यटन को नई राष्ट्रीय पहचान देगी, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम भी बनेगी। फिरोजाबाद जिले के सिरसागंज में 24.45 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा उत्तर प्रदेश का पहला आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम तेजी से तैयार हो रहा है, जिसका लगभग 80 फीसदी से अधिक कार्य पूरा किया जा चुका है। इसको लेकर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने समीक्षा बैठक के दौरान जल्द से जल्द कार्य संपन्न करने के निर्देश दिए।

    विज़ुअल स्टोरीटेलिंग में सजेगा आर्य इतिहास

    इसकी विशेषता पर जानकारी देते हुए मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, इस म्यूजियम में इतिहास को इमर्सिव लर्निंग, विज़ुअल स्टोरीटेलिंग और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के जरिए दिखाया जाएगा, ताकि हर उम्र का व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके। यहां स्थापना और शुरुआती दौर, संस्थापक और स्थानीय नेताओं का योगदान, आजादी की लड़ाई में भूमिका, सिद्धांत और विचारधारा, योग की अहमियत और आज के समय में इसकी जरूरत जैसे जोन बनाए गए हैं। कुल मिलाकर, आर्य गुरुकुल म्यूजियम सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और उनसे प्रेरणा लेने का एक बेहतरीन माध्यम है।

     

    म्यूजियम में ऑडिटोरियम, मल्टीपर्पज हॉल, एम्फीथिएटर, हेलीपैड, फायर फाइटिंग सिस्टम और कई ब्लॉकों का ढांचा तैयार हो गया है और अधिकतर जगहों पर फिनिशिंग का काम चल रहा है। बाहरी इलेक्ट्रिफिकेशन, ट्यूबवेल, अंडरग्राउंड सम्प और कुछ अन्य कार्य प्रगति पर हैं, जबकि सीसी रोड, हॉर्टिकल्चर, तालाब विकास, फ्लोटिंग मल्टीमीडिया और CCTV जैसे कुछ काम अभी शुरू होने बाकी हैं। कुल मिलाकर परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है और तय समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    सत्य, धर्म और सेवा का संदेश देता संग्रहालय

    इसके अलावा इस म्यूजियम में पाँच पिलरों की सीख भी होगी। जिसमें पहला, ईश्वर ही सच्चे ज्ञान का असली स्रोत है-वह निराकार, अनंत और पूरी सृष्टि का रचयिता है। दूसरा, वेद हमें सही सोच और सही जीवन जीने का मार्ग दिखाते हैं, इसलिए उन्हें समझना और उनके अनुसार चलना हमारी जिम्मेदारी है। तीसरा, हमें हर हाल में सच का साथ देना चाहिए और गलत बातों से दूर रहना चाहिए, ताकि हमारा हर कदम धर्म और ईमानदारी पर टिका हो। चौथा, हमारा उद्देश्य केवल अपनी तरक्की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक उन्नति करना है। और पाँचवां, हमें सभी लोगों के साथ प्रेम, सम्मान और न्याय से व्यवहार करना चाहिए एवं दूसरों की प्रगति में ही अपनी सफलता देखनी चाहिए।

    वैश्विक स्तर पर नई पहचान

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने हाल ही में हुई एक बैठक में इसे जल्द पूरा करने का निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि आर्य गुरुकुल म्यूजियम हमारे अतीत की विरासत और भविष्य की संभावनाओं के बीच एक सशक्त माध्यम है। अब सिर्फ आगरा का ताजमहल ही नहीं बल्कि आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान कायम करेगा। ब्रज क्षेत्र का यह म्यूज़ियम केवल इतिहास को संजोने का प्रयास नहीं, बल्कि उस चेतना को फिर से जागृत करने का संकल्प है जिसने समाज को ज्ञान, समानता और राष्ट्रभाव की दिशा दी।

    आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी के दिल और दिमाग से जोड़ रहे हैं, ताकि वे केवल इतिहास को जानें ही नहीं, बल्कि उसे महसूस करें, समझें और उससे प्रेरणा लेकर एक सशक्त भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

    हाल ही में पर्यटन मंत्री ने प्रमुख और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को लेकर अहम समीक्षा बैठक की थी, जिसमें फिरोजाबाद में बन रहे ग्लास म्यूजियम फिरोजाबाद, मैनपुरी के कल्चरल सेंटर, आर्य गुरुकुल म्यूजियम तथा सामौर बाबा मंदिर कॉम्प्लेक्स की प्रगति और विकास योजनाओं का विस्तार से अवलोकन किया गया था।

    वेदों की ओर लौटो

    आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम सिर्फ एक भवन नहीं है, बल्कि एक ऐसे आंदोलन की कहानी बताएगा, जिसने भारत में सोच, समाज और देशभक्ति को नई दिशा दी। आर्य समाज ने “वेदों की ओर लौटो” का संदेश देकर लोगों को जागरूक किया और सामाजिक बराबरी, शिक्षा और तर्क की सोच को मजबूत बनाया। यह म्यूज़ियम आज की पीढ़ी के लिए एक एजुकेशनल हब की तरह काम करेगा, जहां लोग अपने इतिहास और संस्कारों को आसान और दिलचस्प तरीके से समझ सकते हैं।

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