नई दिल्ली। भारतीय बैडमिंटन टीम के पूर्व मुख्य कोच और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित विमल कुमार ने कहा है कि भारत को युगल स्पर्धाओं के स्तर में सुधार के लिए ठोस और दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इसके लिए बैडमिंटन के मजबूत देशों के साथ द्विपक्षीय श्रृंखला और टेस्ट मैचों का आयोजन बेहद जरूरी है।
विमल कुमार ने कहा कि सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की पुरुष युगल जोड़ी विश्व की सर्वश्रेष्ठ जोड़ियों में शामिल है, लेकिन इसके अलावा अन्य भारतीय युगल खिलाड़ियों का स्तर चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि पुरुष युगल, महिला युगल और मिश्रित युगल—तीनों ही वर्गों में भारत को और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, तनीषा क्रास्टो और ध्रुव कपिला जैसी जोड़ियां अभी शीर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं।
प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी के सह-संस्थापक और मुख्य कोच कुमार ने सुझाव दिया कि भारत को मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ बेहतर संबंध बनाकर उनकी अंडर-21 टीमों के खिलाफ नियमित टेस्ट मैच खेलने चाहिए। उन्होंने कहा कि इन देशों के साथ मिलकर तीन या चार शहरों में एक क्षेत्रीय सर्किट तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि टीम प्रतियोगिताओं में खेलने से खिलाड़ियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे युवा खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करना सीखते हैं। भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) से उन्होंने इस दिशा में पहल करने का आग्रह करते हुए द्विपक्षीय या त्रिकोणीय श्रृंखला को एक व्यावहारिक मॉडल बताया।
विमल कुमार ने कहा कि हालांकि भारत का घरेलू बैडमिंटन सर्किट मजबूत है, लेकिन पूर्वी देशों की अलग खेल शैली को समझना और उसके अनुरूप खुद को ढालना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि निरंतर अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के जरिए ही इस अंतर को पाटा जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को केवल शीर्ष खिलाड़ियों तक सीमित न रहकर उन खिलाड़ियों पर भी ध्यान देना चाहिए, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में खेलने के लिए अतिरिक्त सहयोग की जरूरत है। उनके अनुसार, भारत के पास शीर्ष 50 और 100 में कई अच्छे खिलाड़ी हैं, लेकिन शीर्ष 30 में जगह बनाना सबसे बड़ी चुनौती है, जिस पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।

