मेरठ । विश्व में 21 मार्च इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। चेन्नई का खूबसूरत समुद्र तट पर विश्व में पहली बार ताईची डे मनाया जाएगा। एक ओर समुद्र की लहरें नजारा दिलकश बनाएंगी, वहीं इस तट पर नेशनल वुशु चैम्पियनशिप में खिलाड़ी अपना दमखम दिखाएंगे। यह इतिहास रचेगा वुशु एसोसिएशन आॅफ इंडिया जो इन कार्यक्रमों का आयोजन करेगा।
समुद्र तट पर ताईची डे मनाने के साथ-साथ वुशु चैम्पियशिन के आयोजन की बात सुनकर यहां चीन से आए मिनिस्टर काउंसलर वैंग जिनमिंग और चीनी एम्बेसी से आए फार्स्ट सेके्रटरी जहैंग हॉलिन बेहद खुश हुए। मिनिस्टर काउंसलर वैन जिनमिंग ने कहा कि विश्व में पहली बार सुम्रद तट पर ताईची डे मनाना हमारे के लिए सौभाग्य की बात है। इसके लिए उन्होंने डब्लूएआई के अध्यक्ष जितेन्द्र भाजवा व उनकी टीम का आभार जताया। उन्होंने अगले वर्ष डब्लूएआई के साथ ताईची मनाने की भरोसा दिलाया।
दरअसल यूनेस्को ने वुशु से संबंधित ताईची को इंटरनेशनल कल्चर हेरिटेज के लिए वर्ल्ड ताईची डे घोषित किया है। 21 मार्च को यह दिवस विश्व में मनाया जाएगा, लेकिन भारत में यह अलग अंदाज में मनाया जाएगा। यहां चेन्नई के कोलम बीच पर इसका भव्य आयोजन वुशु एसोसिएशन आॅफ इंडिया द्वारा किया जाएगा। इस मौके पर बीच पर नेशनल वुशु चैम्पियनशिप आयोजित की जाएगी। गुरुवार को मेरठ आए चीन के प्रतिनिधि मिनिस्टर काउंसलर वैंग जिनमिंग और चीनी एम्बेसी से आए फार्स्ट सेके्रटरी जहैंग हॉलिन को इस संबंध में इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के वुशु एसोसिएशन आॅफ इंडिया और वुशु एसोसिएशन आफ एशिया के एक्जिक्यूटिव काउंसिल के सदस्य भूपेन्द्र बाजवा और वुशु एसोसिएशन आॅफ इंडिया के अध्यक्ष जितेन्द्र बाजवा ने जानकारी दी।
यह सुनकर वह बेहद खुश नजर आए। मिनिस्टर काउंसलर वैंग जिनमिंग ने कहा कि डब्लूएआई भारत में वुशु को तेजी से लोकप्रिय खेल बना दिया है। देश में वुशु की 40 से अधिक स्टेट यूनिट होना अपने आप में मायने रखता है। भारत के बड़ी संख्या खिलाड़ी वुशु में विश्व चैम्पियनशिप, एशिया चैम्पियशिप में अवार्ड और मैडल जीते यह इसी बात को दर्शाता है कि भारत में बच्चे और युवा इस खेल को अपना रहे हैं।
इससे पूर्व भूपेन्द्र बाजवा, जितेन्द्र बाजवा ने डब्लूएआई के बारे में चीन के प्रतिनिधिमंडल को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डब्लूएआई का गठन 1989 में हुआ था। इस संस्था को मिनिस्ट्री आॅफ युथ एंड स्पोर्ट्स और इंटरनेशनल वुशु फेडरेशन से मान्यता है। देश की सेना की सभी कोर, पैरा मिल्ट्री फोर्स में वुशु शामिल है। उन्होंने बताया कि ताईची डे पर पहली बार समुद्र तट पर नेशनल वुशु प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल ने मेरठ के इतिहास के बारे में जानकारी ली। उन्होंने प्रसिद्ध एवं प्रचीन औघड़नाथ मंदिर के दर्शन किए। उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के उदगमस्थल के दर्शन करने के बाद कैंट स्थित शीशे वाले गुरुद्वारे में माथा टेका और श्री गुरुग्रंथ साहिब के आगे शीश नवाया।



