जयपुर। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) जयपुर एवं आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में पंचकर्म शिक्षकों हेतु आयोजित छह दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हुआ। यह कार्यक्रम 18 से 23 अगस्त तक एनआईए परिसर में चला।
समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में पंचकर्म का विशेष महत्व है। इसके माध्यम से संस्थान में जटिल से जटिल रोगों का सफल उपचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सीएमई कार्यक्रम पंचकर्म शिक्षकों की शैक्षणिक नींव को मजबूत करेगा तथा आयुर्वेद शिक्षा में उत्कृष्टता को नई दिशा देगा।
पंचकर्म विभागाध्यक्ष प्रो. गोपेश मंगल ने बताया कि देशभर से आए 30 शिक्षकों को पंचकर्म के मूल सिद्धांतों, आभ्यंतर एवं बाह्य स्नेहन, स्वेदन, विरेचन, वमन, बस्ति, रक्तमोक्षण, उत्तर बस्ति और नस्य कर्म जैसे प्रमुख विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही संसरजन क्रम, फिजियोथैरेपी एवं क्रियाकल्प जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में व्याख्यान, संवादात्मक सत्र और प्रायोगिक प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों के प्रशिक्षण, ज्ञानवर्धन और शिक्षण कौशल को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया।
इस अवसर पर प्रो. अनुप ठाकुर, प्रो. अरुण गुप्ता, प्रो. गोपेश मंगल, डॉ. सर्वेश कुमार सिंह, डॉ. पुलक कांतिकार, डॉ. प्रवीण बी.एस., प्रो. गुलाब पमनानी, प्रो. संतोष कुमार भट्टेड, प्रो. आशीष मेहता, डॉ. अश्विनी कुमार एम., प्रो. सचिन शांतिलाल चंदलिया और प्रो. आनंदरामन शर्मा सहित देशभर के पंचकर्म विशेषज्ञों ने अपने विचार एवं अनुभव साझा किए।