
लखनऊ। मलिहाबाद में जहां एक तरफ सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर हरे भरे वृक्षों को लगवाने का काम कर रही है वही जिम्मेदारों की शह वन माफियाओं द्वारा लगातार प्रतिबंधित हरे-भरे पेड़ो की कटान जारी है।
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सूत्रों की मानें तो रहीमाबाद थाना क्षेत्र के अंहिडर पंचायत के मजरे राईहार गांव निवासी किसान संतोष राजपूत की आम की बाग में खड़े हरे भरे काफी पुराने पेड़ों को वन माफिया द्वारा मंगलवार को दिन में कटवा कर ट्रैक्टर ट्राली व डाले में लादकर रोड से होकर धर्म कांटे व जनपद में चल नहीं आरा मशीनों पर डाली जा रही है।जबकि सड़क पर ट्रैक्टर ट्राली व डाला पुलिस से लेकर वन विभाग तक देखते रहते हैं लेकिन अंजान बने रहते हैं। अगर कहीं किसान एक भी पेड़ काट ले तो सारा कानून बता देते हैं लेकिन वही ठेकेदार हरे भरे वृक्षों को बिना परमिट के प्रतिबंधित पेड़ों को कटवा लेते हैं।जिसके बाद भी जिम्मेदार अनजान बने रहते हैं।
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बिना परमिट के कटवाते हैं प्रतिबंधित पेड़
सूत्रों की मानें तो किसान से पेड़ खरीदने के बाद फिर लकड़ी ठेकेदार द्वारा पुलिस से सांठगांठ करने के बाद पुलिस भी मौके पर पेड़ों को देखने के बाद ही देती है परमिशन, वही वन विभाग के भी जिम्मेदार मौके पर जाकर पेड़ों को गिनती करने के बाद ही पेड़ों को काटने का देते हैं परमिशन, यह दोनों विभाग परमिशन देने के साथ-साथ यह भी बता देते हैं कि लकड़ी कटने के तुरंत बाद ठूठों को भी खुदवा कर ट्रैक्टर से जुताई करवाकर पानी भरवा दो अगर शिकवा शिकायत हुई तो हम देख लेंगे।लेकिन वही अगर कहीं शिकायत भी हो गई तो यह दोनों विभाग हर संभव मदद करते हैं।
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अधिकांश अवैध कटान के मामले में थाने पर ही मुकदमा पंजीकृत कराते हैं क्योंकि अगर सारे पेड़ों का जुर्माना भरना पड़ेगा तो महंगा पड़ जाएगा। इसी के चलते इस तरह से जिम्मेदार खेलते हैं खेल। वही सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर वृक्षारोपण करवाती है जबकि बीती 22 जुलाई को वृक्षारोपण कराया गया था।
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जिसके बाद से देखा जाए तो काफी संख्या में हरे भरे प्रतिबंधित पेड़ कटवाए जा रहे हैं समय रहते अगर इस फल पट्टी क्षेत्र में अवैध कटान पर प्रतिबंध न लगाया गया तो फल पट्टी क्षेत्र का नाम तो रहेगा, लेकिन पेड़ नहीं रहेंगे सबसे बड़ी बात यह है कि जब वन रक्षक ही भक्षक बन रहे तो कौन करेगा इन हरे-भरे प्रतिबंधित पेड़ों की रखवाली। यह सवाल प्रत्यक्षदर्शियों में चर्चा का विषय बना हुआ है।



