भगवान भोलेनाथ और देवी पार्वती की हुई हल्दी की रस्म 

श्रीमहंत दैव्यागिरी जी महाराज के अगुवाई में हुआ विवाह उत्सव

लखनऊ। महाशिवरात्रि से एक दिन पूर्व आदिगंगा गोमती के तट पर स्थापित प्राचीन श्रीमनकामेश्वर मंदिर/मठ में भगवान भोलेनाथ और देवी पार्वती के विवाहोत्सव की धूम मची।साथ ही नंदीश्वर  जी की स्थापना  हुई।जहा पहले वहां हल्दी और मेंहदी की रस्म की गई।
मंदिर की श्रीमहंत दैव्यागिरी जी महाराज की अगुवाई में विवाह रस्म की कार्यक्रम की शुरूआत की गई। डालीगंज में गोमती नदी के तट पर स्थित मदिर प्रांगण में विवाह का पूरा उल्लास छाया हुआ था। वहां खूब सजाकर भगवान का विवाह मंडप बनाया गया और उसके बीच में खम्ब भी लगाया गया। इसके अलावा भगवान भोलेनाथ और गौरा जी के विवाह की दूसरी सारी तैयारियां भी चल रही थीं। मंदिर के सेवादारों में कुछ वरपक्ष के बने थे तो कुछ महिलाएं पार्वती जी की सखिया का रूप धरे थीं। मंदिर के आंगन को कलश और रंगोली से सजाया गया था।
Turmeric ceremony of Lord Bholenath and Goddess Parvati

शहर की नटराजन लीला मंडली के कलाकारों में प्रदीप भगवान शंकर का रूप धरे थे,वहीं गुड्डन ने देवी पार्वती का वेष रखा हुआ था। वे सब पूरे विवाह की लोक पावनी कथा को लीला मे रूप में दर्शा रहे थे, जिसका वहां आए भक्त रसपान कर रहे थे। वहीं महिलाएं ढोलक की थाप पर  हल्दी और मेहदी की रस्म पर गाये जाने वाली गीत गा रही थीं। श्रीमहंत दैव्यागिरी ने बताया कि  विवाह मानव जीवन के 16 संस्कारों में एक महत्वपूर्ण संस्कार है। विवाह के बाद मनुष्य गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है, इसके बाद उसे गृहस्थ जीवन की मयार्दा के अनुकूल ही समाज में व्यवहार कर नियम पूर्वक जीवन जीना चाहिए।

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