भारतीय बैंकिंग में बदल रही है भरोसे की परिभाषा

कानपुर।आज के दौर में बैंकिंग सिर्फ पैसे रखने या लेन-देन तक सीमित नहीं रह गई है। ग्राहक अब पहले से ज्यादा जागरूक हैं, उनके पास जानकारी भी है और विकल्प भी। ऐसे में वे सिर्फ बैंक की आर्थिक मजबूती नहीं देखते, बल्कि यह भी चाहते हैं कि बैंक की सेवा भरोसेमंद हो, जिम्मेदारी से काम करे और हर समय साथ खड़ा रहे। इस विषय पर उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने ग्राहकों का खूब भरोसा जीता है।

उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक में हेड-रिटेल लाइबिलिटीज़, टीएएससी और टीपीपी  हितेंद्र झा कहते हैं, “कुछ समय पहले तक ग्राहकों का भरोसा बैंक की शाखा, वहाँ काम करने वाले लोगों और तय प्रक्रियाओं से बनता था। लेकिन अब समय बदल चुका है। तकनीक के आने से बैंकिंग तेज और आसान हुई है, इसलिए अब ग्राहक सुविधा के साथ-साथ भरोसेमंद सेवा को भी उतना ही महत्व देते हैं।पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र का बड़ा लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना रहा। इस दिशा में काफी काम भी हुआ और अब देश के अधिकतर लोग बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच बना चुके हैं।

लेकिन, अब ग्राहकों की उम्मीदें इससे आगे बढ़ गई हैं। वे चाहते हैं कि उनका बैंक हर हाल में भरोसे के साथ काम करे और बदलते हालात में भी जिम्मेदारी निभाए।तकनीक ने बैंकिंग को काफी बदल दिया है। आज भुगतान कुछ ही सेकंड में हो जाता है, खाते कहीं से भी खोले जा सकते हैं और कई फैसले पहले से कहीं ज्यादा तेजी से लिए जाते हैं। इससे लोगों और कारोबार दोनों के लिए पैसों का प्रबंधन आसान हुआ है।

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