- प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और ऑटोमेशन के माध्यम से डेटा प्रबंधन व रिपोर्टिंग को बनाया जाएगा आधुनिक
लखनऊ।उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन कार्यालय में आधुनिक तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो दिवसीय ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कार्यशाला’ का आयोजन किया गया। मिशन निदेशक पुलकित खरे की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी की।

कार्यशाला के समापन अवसर पर मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक का प्रभावी उपयोग प्रशासनिक कार्यों में गति और गुणवत्ता दोनों को बढ़ाने का माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि डेटा प्रबंधन, फाइलिंग और रिपोर्ट तैयार करने जैसे दैनिक कार्यों में एआई के उपयोग से समय की बचत के साथ कार्यों की सटीकता भी सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यशाला में सीखी गई तकनीकों को अपने कार्यक्षेत्र में लागू करते हुए मिशन के लक्ष्यों को अधिक तेजी और दक्षता के साथ प्राप्त किया जाए।

प्रशिक्षण सत्र के लिए विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश से आई विशेषज्ञों की टीम ने लगभग 6 घंटे चले सत्रों में कर्मचारियों को एआई के व्यावहारिक उपयोग से अवगत कराया। इस दौरान विभिन्न एआई टूल्स एवं सॉफ्टवेयर का प्रदर्शन करते हुए बताया गया कि जटिल और समय लेने वाले कार्यों को किस प्रकार कम समय में प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकता है।
कार्यशाला में ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग’ और ऑटोमेशन के माध्यम से कार्यक्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। कर्मचारियों को सिखाया गया कि किस प्रकार दस्तावेजों के त्वरित विश्लेषण, सटीक डेटा प्रविष्टि तथा रिपोर्ट तैयार करने जैसे कार्यों को सरल और त्रुटिरहित बनाया जा सकता है। कार्यशाला के दौरान यह भी बताया गया कि एआई के उपयोग से मिशन की मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग प्रणाली को डिजिटल रूप से सशक्त बनाया जा सकेगा, जिससे क्षेत्रीय कार्यों की निगरानी अधिक प्रभावी और पारदर्शी होगी।

प्रशिक्षण सत्र में कर्मचारियों ने एआई के उपयोग से संबंधित विभिन्न प्रश्न भी पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा उदाहरण सहित समाधान प्रस्तुत किया गया। बताया गया कि जिन कार्यों में पहले घंटों का समय लगता था, उन्हें अब एआई के माध्यम से कुछ ही मिनटों में पूरा किया जा सकता है।
कार्यशाला के अंत में मिशन निदेशक ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए प्रशासनिक कार्यों में नवाचार लाएं, जिससे प्रदेश में कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।





