जयपुर।राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के राजनीति विज्ञान विभाग में शुक्रवार को “भारतीय राजनीतिक चिंतन परंपरा और समकालीन समाज” विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन भावेश महेंद्र ने प्रस्तुत किया। राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी (बिहार) के पूर्व कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा तथा विशिष्ट वक्ता के रूप में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. राम सिंह आढा उपस्थित रहे।
स्वतंत्रता को विशेष महत्व दिया गया
मुख्य वक्ता प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय राजनीतिक चिंतन की जड़ें “वसुधैव कुटुम्बकम” और “लोककल्याण” की भावना में निहित हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज की चिंतनशील परंपरा से जुड़ी रही, इसलिए यह आज तक जीवित है। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता को विशेष महत्व दिया गया, क्योंकि सत्य की खोज निरंतर प्रश्नों से ही संभव होती है।
राज्यव्यवस्था पर चर्चा करते हुए प्रो. शर्मा ने स्पष्ट किया कि भारतीय राजतंत्र पाश्चात्य राजतंत्र से भिन्न था, जहाँ राजा भी सभा और समिति की सहमति के बिना निर्णय नहीं ले सकता था। उन्होंने भारतीय संस्कृति को समावेशी और सर्वसमावेशी बताते हुए कहा कि यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
विशिष्ट वक्ता प्रो. राम सिंह आढा ने कहा कि भारतीय राजनीतिक चिंतन परंपरा मूलतः मानव-केंद्रित और समावेशी है। उन्होंने इतिहास को समावेशी दृष्टिकोण से समझने पर बल दिया और इसे भारतीय परंपरा का आधार बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने की। संचालन श्रवण कुमार ने किया और धन्यवाद ज्ञापन अनीशा गुर्जर ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर प्रो. राका सिंह, प्रो. एच.सी. शर्मा, प्रो. गिरिजा जोशी, डॉ. गजेंद्र सिंह, डॉ. सुमन मौर्य, डॉ. हंसा चौधरी, डॉ. मुकेश वर्मा, डॉ. प्रियंका आर्य, डॉ. मीनारानी, डॉ. हरबीर सिंह, डॉ. राम सिंह नाथावत, डॉ. संजू शर्मा सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यार्थियों भावेश महेंद्र, देवेंद्र पचाड़, श्रवण कुमार, अनीशा गुर्जर, रिया, वैष्णवी, नीरज, जितेंद्र, नरेश, अभिषेक, सरवन कुमार, दूदाराम, कपिल, हरवीर, दिनेश और रघुवीर की सक्रिय भूमिका रही।